Description
About the book
प्रस्तुत पुस्तक का उद्देश्य जयपुर रियासत के इतिहास के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर का पर्यटन के दृष्टिकोण से अध्ययन कर आधुनिक परिप्रेक्ष्य में इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाकर सरल भाषा में प्रस्तुत करने का है। इस प्रकार पुस्तक मे यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर के ऐतिहासिक अनुशीलन के साथ-साथ उसके महत्व को समझने तथा उसके संरक्षण एवं पर्यटन विकास में इसकी भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास किया गया है।
उपर्युक्त अध्ययन हेतु जयपुर रियासत के विभिन्न स्थानों यथाः जयपुर, बैराठ साँभर, गलता, आभानेरी, जमवारामगढ़ आदि क्षेत्रों में स्थापित स्मारक, मेल आदि सांस्कृतिक आकर्षण के स्थानों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया है। इस प्रकार जयपुर की सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखने और परखने से इनके वास्तविक स्वरूप का पता चलता हैं कि किस प्रकार यह धरोहर पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक समन्वय, सद्भाव एवं विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रस्तुत पुस्तक में दिये गये चित्रों में से लगभग 80 प्रतिशत लेखक द्वारा कैमरे से स्वयं लिये गये है, तथापि कतिपय छाया-चित्र व आर्किटेक्चरल डिटेल, मानचित्र आदि प्रकाशित पुस्तक आदि से लिये गये है।
इस प्रकार सारांशतः यह पुस्तक जयपुर के रियासत कालीन इतिहास एवं संस्कृति का पर्यटन के दृष्टिकोण से अनुशीलन कर उसे सरल एवं प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास है।
About the author
डॉ. महिपाल यादव
जन्मः 1987, शुक्लावास, कोटपूतली
शिक्षाः एम.ए. (इतिहास) राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, 2010 नेट/जे. आर.एफ. एम.फिल. (गांधी दर्शन) राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर पी.एच.डी., राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, 2021
अवार्ड: जुनियर रिसर्च फैलोशिप अवार्ड, 2016 (भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली)
लेखनः विविध राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोधपत्र वाचन, विविध शोध पत्रों का विभिन्न राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन, पत्र पत्रिकाओं में सामाजिक व सामयिक विषयों पर लेख
सम्प्रतिः महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, नारहेड़ा (कोटपूतली) में इतिहास के व्याख्यता के पद पर कार्यरत हैं।





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