Description
इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य प्राचीन ऋषियों द्वारा अभ्यास किए गए “साधना तत्त्व” के सार को प्रकाशित करना है। इसमें योगीजी के साधना के निजी अनुभवों, साधना के मूल सिद्धांतों एवं तैयारी, तथा साधना जीवन कैसे जिया जाए इसकी उनकी मार्गदर्शनपूर्ण बातें शामिल हैं। साथ ही मानव शरीर की ऊर्जा-संरचनाओं की जानकारी भी दी गई है। योगीजी का गणेश लोक, कृष्ण लोक की यात्रा तथा कुछ बाकी रह गए विषयों का भी इसमें समावेश है। उनकी प्रत्येक उक्ति में गहन एवं छिपे हुए आध्यात्मिक रहस्य हैं, जो उनके अपने शब्दों में उनकी आध्यात्मिक यात्रा की एक झलक प्रदान करते हैं।
About The Author
कलम नाम: राम ऋषि शरण ।
लेखक भारत के ओडिशा राज्य के निवासी हैं; प्राचीन प्रथाओं और आत्म-साक्षात्कार के ज्ञान के उत्साही और साधक हैं। ऋषियों, अवतारों और उनकी शिक्षाओं, अन्वेषणों और यात्राओं के अनुयायी। प्रत्येक मानव रूप अंततः आज या कल आत्म-साक्षात्कार, आत्म-ज्ञान, ईश्वर-साक्षात्कार और दैवीय प्राप्ति की खोज करेगा, चाहे हम इसे किसी भी तरह से व्यक्त करें। इसके अलावा, मानव मन की जिज्ञासा उसे स्वयं, ब्रह्मांड और ब्रह्मांड के विभिन्न तत्वों के अध्ययन की ओर ले जाती है।



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