Description
यह एक छोटे से गांव की लड़की की कहानी है। कैसे वह स्पेस गर्ल बनी और कैसे उसने आसमां को छुआ। यह कहानी बहुत सरल और साधारण शब्दों में लिखी गई है। जिंदगी में मौके भी आते हैं, और ईश्वर हमें शक्ति भी देता है इस दुनिया में कुछ कर गुजरने के लिए। महिला को मौका मिले तो वह इस दुनिया में आसमां छूने में पूरी तरह सक्षम है। “उसकी मां ने बताया, नीलिमा जब 9 महीने की थी तो एक दिन वह घर के अंदर टेबल का सहारा लेकर खड़ी हो गई और कुछ ही मिनटों के बाद ठुमक-ठुमक कर तीन चार कदम चली और बैठ गई। फिर उठी और चलने लगी। चलते समय उसकी छोटी-छोटी पायल छन-छन की मधुर आवाज दे रही थी। जब उसके दादाजी ने देखा तो उत्साहित होकर बड़े जोर से बोले, ‘अरे देखो नीलिमा चलने लगी, नीलिमा चलने लगी’। नीलिमा की मां भी रसोई से आयी और यह दृष्य देख कर बड़ी खुश हुई। दादा जी बोले, ‘इसके कदम आसमान में पहुंचेंगे एक दिन’। ‘ससुर जी इतनी जल्दी इसे आसमान में ना भेजो’ मां बोली।
About The Author
लेखक उत्तराखण्ड का मूल निवासी है। लेखक ने अपनी स्कूली शिक्षा उत्तराखण्ड में की है। और आज वह दिल्ली में एक प्रोफेशनल है। Writer e-mail: prayagikailash@gmail.com, FB page : prayagikailash




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