Description
इस पुस्तक को आपके सामने रखते हुए मुझे हार्दिक खुशी हो रही है, ये किसी सपने के सच होने जैसा है। यह मेरी पहली पुस्तक है। इन कविताओं में मेरी कल्पनाएँ हैं, मेरे अनुभव, मेरे पल – करीने से सजे बाग के फूलों जैसे नहीं, बल्कि मौसम-बेमौसम, अनायास किसी डाली पर बेतरतीबी से उग आईं कलियों की तरह, जो आपको अपनी ओर खींचने को आतुर हैं। मैंने महसूस किया है, कभी-कभी कुछ बातें, यादें या घटनाएँ दिल-दिमाग में इस कदर मचलने लगती हैं कि जब तक उन पर लिख न लिया जाए, चैन नहीं पड़ता।
कविताएँ सामान्य विषयों पर हैं, आपको लगेगा कि ये आपसे जुड़ी बाते हैं, हमारे-आपके घर की, आस-पास के लोगों की, इसी समाज की। सहज, सरल शब्दों में अपनी भावनाओं को पिरोने का प्रयास किया है। अंग्रेजी-बांग्ला भाषा के बोलचाल के शब्द भी आपको इन कविताओं में खूब मिलेंगे। पुस्तक की सार्थकता तभी होगी जब आप ख़ुद को इससे जुड़ा हुआ महसूस कर पाएँ, शीर्षक भी यही कहता है।
अपने उन साथियों का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूँ, जिन्होंने बड़े मन से इस महत् कार्य को पूरा करने में मेरा मेरी मदद की।
About The Author
मेरा परिचय
जन्म – ०१. ०१. १९७३
कोलकाता – कला, साहित्य एवं संस्कृति की उर्वर भूमि, न केवल बंगाल का, बल्कि पूरे भारत का सांस्कृतिक हृदय। इसी माटी में जन्मा, पला-बढ़ा और इसी की खुशबू में रचा-बसा मेरा व्यक्तित्व। पिछले दो दशक से यहाँ के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में अध्यापन। उत्तर-प्रदेश के बलिया जिले में पैतृक निवास, जिससे आज भी संबंध बना हुआ है।
ग्यारहवीं में था, जब पहली बार कविता लिखने का प्रयास किया। कम उम्र, कॉलेज के शुरुआती दिन और जोश हाई। शिक्षा-दान से जुड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि और हिंदी साहित्य से निकटता का संबंध रहा, शायद इसीलिए कविताओं की ओर झुकाव हुआ। कविताएँ अक्सर पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती हैं, कवि-सम्मेलनों में भी पढ़ने का मौका मिला। कभी-कभी लघु कथाओं पर लेखनी चल जाती है।
आधुनिकता के दौर ने कविताओं का एक यूट्यूब चैनल बनवा दिया, sun तो लें, जहाँ मेरी लगभग सौ कविताएँ सुनी जा सकती हैं। चैनल बनाने का श्रेय नीतेश को जाता है, उन्हीं की बदौलत मैं आप तक पहुँच पाता हूँ।
पढ़ने-लिखने के अलावा दोस्तों के साथ अड्डे जमाना, भ्रमण और पुराने गीत-गज़ल सुनना बेहद पसंद। लगभग दस वर्षों तक रंगमंच से सक्रिय रूप से जुड़ा रहा। अब खाली समय लेखन-कार्य को समर्पित।





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