Description
“दिव्य धरोहर” लिशा पटेल ‘दिव्य’ की प्रथम साहित्यिक कृति है, जिसमें उन्होंने प्रकृति, संस्कृति, जीवन की संवेदनाएँ, सुख-दुख, विजय-पराजय, कर्म और धर्म के विविध पहलुओं को काव्य रूप में पिरोया है। यह संग्रह छंद बद्ध कविता की परंपरा को समर्पित है, जिसमें छंद के सभी तत्वों—भाव, शैली, यति, गति, तुक आदि—का संतुलित संयोजन देखने को मिलता है। लेखिका का मानना है कि कविता केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि भावों की वह सशक्त धारा है जो समाज, संस्कृति और समय की सजीव झलक प्रस्तुत करती है। सरल और गूढ़ अर्थों से सजी उनकी कविताएं सामान्य पाठक को भी गहराई से छूती हैं। यह कृति उनके साहित्य प्रेम, गुरुजनों के आशीर्वाद और पारिवारिक सहयोग का सुंदर प्रतिफल है, जिसे उन्होंने अपनी अमूल्य “धरोहर” के रूप में साहित्य जगत को समर्पित किया है।





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