Description
About the book
“प्रस्तुत पुस्तक “”धड़कन”” (कुमार मदनपुरी की) एक संगीतमय गुणों से परिपूर्ण काव्य रचना है। इसका प्रत्येक गीत सरस मधुर और अकल्पनीय आनंद की अनुभूति कराने वाला है। इससे पूर्व प्रकाशित पुस्तक “”मेरे गीत मेरे आँसू”” को आप सभी पाठकों ने जो प्यार और सम्मान दिया उसके लिये मैं आपका आभारी हूँ।
अब मेरी पुस्तक “”धड़कन “” आपके कर कमलों में समर्पित कर रहा हूँ, आशा है यह संकलन आपको जरूर पसंद आयेगा। आप अपने अमूल्य अनुभवों से हमें अवश्य अवगत करायें। आपके स्नेह का आकांक्षी,
आपका- कृष्ण कुमार शर्मा
पता- मदनापुर, बिसवां- सीतापुर
सम्पर्क मो०नं०- 9935071157″
About the author
“कवि का परिचय:- कुमार मदनपुरी (कृष्ण कुमार शर्मा) का जन्म 08 जून 1967 को उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के मदनापुर नामक गाँव में एक भट्ट ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता पं० श्री कन्हैयालाल भट्ट एक सरकारी स्कूल में अत्यन्त अल्प वेतन पाने वाले अध्यापक थे और अध्यात्मिक ज्ञान के प्रकाण्ड विद्वान थे। समाज के अत्यन्त प्रतिष्ठित व्यक्तियों में उनकी गणना होती थी। माता श्रीमती सावित्री देवी ममता की प्रति मूर्ति और परम विदुषी थीं।
कृष्ण कुमार शर्मा ने कानपुर वि०वि० से हिन्दी विषय से परास्नातक किया तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग, इलाहाबाद से साहित्य रत्न, शिक्षा विशारद तथा आयुर्वेद रत्न की उपाधियाँ प्राप्त की थीं। कवीत्व की प्रतिभा इनमें बचपन से ही विद्यमान थी। सन् 1984 से 86 तक आई.टी.आई. प्रशिक्षण प्राप्त करने के दौरान इन्हें लखीमपुर खीरी में रहना पड़ा उन दिनों प्रशिक्षण के बाद अपने बचे हुये समय का उपयोग समाचार पत्रों में विभिन्न लेख गीत और कहानियाँ लिखने में किया। लखीमपुर-खीरी से छपने वाला साप्ताहिक समाचार पत्र अमृत प्रवाह में काफी समय तक बतौर संवाददाता का भी काम किया।
1995 में इन्होंने शिक्षा की दुर्दशा देख कर अपने माता पिता की स्मृति में “” सावित्री देवी कन्हैया लाल शिक्षण संस्थान कृष्णानगर”” के नाम से एक विद्यालय की स्थापना की, जिसमें अपने अनुज श्री अंजनी कुमार शर्मा के साथ शिक्षण कार्य में संलग्न हो गये।
कुमार मदनपुरी (कृष्ण कुमार शर्मा) का पहला कव्य संग्रह “” मेरे गीत मेरे आँसू”” कुछ समय पूर्व प्रकाशित हो चुका है जिसे पाठको ने हाथों हाँथ लिया और काफी लोकप्रियता प्राप्त हुई।
प्रस्तुत पुस्तक “”धड़कन”” कुमार मदनपुरी के विविध प्रकार के गीतों का संकलन है जिसकी सभी रचनायें अत्यन्त सरस मधुर और गायन के योग्य हैं।”





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