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स्पंदनिका : जीवन के अनछुए तारों की झंकार

349.00

Title: स्पंदनिका : जीवन के अनछुए तारों की झंकार

ISBN: 9789373357409

Author Name: Dr. Sanjay Peshivadiya

Language: Hindi

Genre: FICTION / General

MRP: 349

Page: 258

Size: 5.5×8.5

Delivery Time: 7-9 Days

Description

About The Book :

साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं है, बल्कि यह जीवन की उलझनों को सुलझाने और अंतर्मन को दिशा देने वाला एक प्रकाश-स्तंभ भी है। आदरणीय डॉ. संजय पेशीवाडिया जी का यह नवीनतम कहानी संग्रह ‘स्पंदनिका’ इसी प्रकाश को पाठकों के हृदय तक पहुँचाने का एक अत्यंत सार्थक और सुंदर प्रयास है। ‘स्पंदनिका’ का अर्थ ही है—वह सूक्ष्म कंपन या धड़कन, जो जीवन के हर भाव के साथ हमारे भीतर उठती है।
इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विषय-विविधता और गहराई है। डॉ. पेशीवाडिया जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से मानव जीवन के उन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को छुआ है, जिनसे हम प्रतिदिन गुजरते हैं।
कहानियों के मुख्य स्वर और उनकी प्रासंगिकता:
सामाजिक और जीवन उपयोगी: इस संग्रह की कहानियाँ शून्य में नहीं विचरतीं, बल्कि वे हमारी सामाजिक संरचना की ठोस जमीन पर खड़ी हैं। हर कहानी अपने आप में जीवन उपयोगी है, जो हमें यथार्थ का सामना करना सिखाती है और व्यावहारिक जीवन की उलझनों के समाधान प्रस्तुत करती है।
सकारात्मकता और अनुशासन: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य अक्सर खुद को अकेला और कमजोर महसूस करता है। ऐसे में यह पुस्तक एक सच्चे मार्गदर्शक की तरह सामने आती है। कहानियों के पात्रों के माध्यम से लेखक ने यह बहुत ही सरलता और प्रभाव के साथ स्थापित किया है कि आत्मविश्वास, समय पालन (अनुशासन) और मन की शक्ति कैसे एक साधारण इंसान को असाधारण उपलब्धियों तक ले जा सकते हैं।
भावनात्मक गहराई: जहाँ एक ओर यह संग्रह जीवन के व्यावहारिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर बात करता है, वहीं दूसरी ओर यह मानवीय संवेदनाओं के सबसे कोमल और शाश्वत धागों—’प्रेम’ और ‘विरह’—को भी पूरी शिद्दत से महसूस कराता है। प्रेम की पूर्णता का उल्लास हो या विरह की मौन कसक, लेखक ने इन भावों को शब्दों के माध्यम से जिस जीवंतता के साथ उकेरा है, वह पाठकों की आँखों को नम और हृदय को तृप्त कर देता है।

About The Author :

बहुआयामी रचनाकार: डॉ. संजय पेशीवाडिया
इस उत्कृष्ट कृति के पीछे एक ऐसे रचनाकार का दृष्टिकोण है, जिनका जीवन स्वयं समाज सेवा और साहित्य को समर्पित है। डॉ. संजय पेशीवाडिया जी केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् भी हैं। साहित्य, सामाजिक कार्यों और शैक्षणिक प्रवृत्तियों में उनके निरंतर और निस्वार्थ योगदान के लिए उन्हें ‘लायंस क्लब’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
साहित्य के क्षेत्र में उनका समर्पण इस बात से झलकता है कि वर्तमान में वे गुजराती भाषा में 11 पुस्तकों पर कार्य कर रहे हैं। गुजराती साहित्य जगत को समृद्ध करने के बाद, ‘स्पंदनिका’ उनके द्वारा हिंदी में लिखा गया पहला कहानी संग्रह है, जो निश्चित रूप से हिंदी के पाठकों के लिए एक अनुपम भेंट है। इसके अतिरिक्त, वे सूरत की प्रतिष्ठित संस्था ‘स्पंदन परिवार’ के संस्थापक भी हैं। यह संस्था साहित्यिक कार्यों को बढ़ावा देने और उत्कृष्ट पुस्तकों के प्रकाशन के माध्यम से समाज में निरंतर वैचारिक क्रांति ला रही है।
निष्कर्ष:
डॉ. संजय पेशीवाडिया जी ने शब्दों और अनुभूतियों का एक ऐसा इंद्रधनुष रचा है, जिसमें जीवन के हर रंग की छटा मौजूद है। उनकी भाषा शैली अत्यंत सहज, संप्रेषणीय और सीधे मन में उतर जाने वाली है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि ‘स्पंदनिका’ की हर एक कहानी पाठकों के हृदय के तारों को झंकृत करेगी, उनके भीतर एक नया स्पंदन पैदा करेगी, और जीवन को देखने का एक नया, सकारात्मक नज़रिया प्रदान करेगी। इस उत्कृष्ट साहित्यिक रचना के लिए डॉ. संजय पेशीवाडिया जी को हार्दिक बधाई एवं पाठकों को इस सुंदर वैचारिक यात्रा के लिए अनंत शुभकामनाएँ!

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