Description
इस किताब का उद्देश्य समाज में तथा युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता लाना है क्योंकि आज के युवा सनातन धर्म व उसकी संस्कृति को कमजोर एवं मान्यताहीन मानते हैं। आज लोगों को यह ज्ञात ही नहीं है कि जो हम आज सीख रहे हैं वो सारी चीजें हजारों साल पहले ही हमारे ऋषि-मुनियों ने वेदों एवं ग्रंथों में बता दिया। लोग नहीं जानते कि जिस संस्कृति को पुरानी बताकर हम छोड़ रहे हैं वो संस्कृति एवं उसकी सारी परंपरायें विज्ञान पर आधारित है। हमने वेदों को पढ़ना छोड़ा परंतु यह नहीं जाना कि वेदो में हर तरीके की खोज, चिकित्सा, शिक्षा, व्यापार, विज्ञान, अंतरिक्ष तक के बारे में वर्णन है। दुनिया आज नई पद्धति अपना रही है परंतु वेदो में पहले ही स्पष्ट रुप से सब लिखा है। सबसे खास बात वेद पुराण तब लिखे गए थे जब अन्य धर्म की उत्पत्ति भी नहीं हुई थी । इन सभी बातों से आज का युवा अज्ञात है क्योंकि लोगों ने बिना सोचे समझे धर्म एवं वेदों से खुद को दूर कर दिया और यही सबसे बड़ी वजह है भारत देश के खंडन की। समाज में फिर धर्म एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता आनी चाहिए तभी भारत का विकास संभव है।

About The Author
अंशुल शुक्ला (खुर्द) ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में लिखना प्रारंभ कर दिया यह इनकी पहली किताब है। यह किताब इन्होंने बारहवीं की पढ़ाई के बीच में ही लिखी है। यह राष्ट्रवादी विचारधारा वाले हैं। लिखने के साथ-साथ यह समाजिक कार्यों में भी अपना योगदान देते हैं। इनके पिता का नाम श्री बृज किशोर शुक्ला एवं माता का नाम श्रीमती रजनी शुक्ला है। यह कोंच (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। इनका मानना है हम अपने जीवन में कुछ भी करें उसके साथ-साथ कुछ ऐसा भी करें जिससे धर्म एवं देश को मजबूती मिले। अगर हर मनुष्य कुछ समय ही देश के लिए दे तो राष्ट्र स्वयं मजबूत हो जाएगा। यह अपने लिए से भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता लाना चाहते हैं।





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