Description
छठी शताब्दी ईसा-पूर्व की पृष्ठभूमि पर आधारित यह काल्पनिक कृति एक ऐसे अभावग्रस्त, सूखे से जूझ रहे कृषक की यात्रा का अनुसरण करती है, जिसे देखकर सिद्धार्थ ने अपने महात्याग का निर्णय लिया और अंततः वही कृषक उनके बुद्धत्व का कारण बना।
यह उपन्यास केवल एक ऐतिहासिक कल्पना ही नहीं, अपितु भारतीय दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का समावेश भी है। एक मनुष्य के अहंकार, भय, क्रोध, वासना, प्रेम, करुणा और छल को छूता हुआ यह उपन्यास पाठक को विविध भारतीय दार्शनिक परंपराओं से परिचित कराता है और मानवीय मन की जटिलताओं की जांच करता है।
यह उपन्यास भारतीय दर्शन, ऐतिहासिक कथाओं और मानव मनोविज्ञान के प्रेमियों के लिए है। सुभूति नामक निर्धन कृषक के चरित्र रूपांतरण और सिद्धार्थ के बुद्धत्व की यह गाथा जीवन-मृत्यु के रहस्यों और साक्षी भाव का अन्वेषण करती है। यह गंभीर पाठकों के लिए आत्म-मंथन का एक सशक्त माध्यम है।
About The Author
दीपक लोहुमी एक लेखक और कथाकार हैं, जो मानवीय अनुभवों के प्रति गहरी जिज्ञासा रखते हैं। कॉर्पोरेट नेतृत्व के अनुभवों से मिले अनुशासन को वे अब अपने लेखन और सिनेमाई परियोजनाओं में पिरोते हैं। भारतीय इतिहास, दर्शन और अपनी यात्राओं से प्रेरित होकर, उनका लेखन प्राचीन विरासत और आधुनिक अस्तित्व के बीच के अंतर को पाटता है, और वे दुनिया को एक दार्शनिक दृष्टिकोण से देखते हैं।
वे अपनी रचनाओं में थिएटर, कविता और फोटोग्राफी के अपने बहुमुखी अनुभवों को समाहित करते हैं। वर्तमान में, वे थिएटर की अपनी गहरी समझ का उपयोग करते हुए लघु फिल्मों की पटकथा लिखने पर काम कर रहे हैं, ताकि जटिल मानवीय भावनाओं को दृश्य रूप दिया जा सके। ‘बोधपुरुष’ उनके इसी यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ वे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक जीवन के मिलन बिंदु को गहराई से तलाशते हैं।





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