Description
यह कविता–संग्रह सिर्फ़ शब्दों का मेल नहीं, बल्कि उन भावनाओं की यात्रा है जिन्हें जीवन ने चुपचाप गढ़ा है — प्रेम, विरह, आत्मसंघर्ष, संवेदना और उम्मीद।
हर कविता एक एहसास है — कभी किसी बिछड़ते रिश्ते की टीस, कभी किसी मुस्कान का उजाला, तो कभी अपने भीतर के अँधेरे से लड़ने का साहस।
रंजन कुमार श्रीवास्तव की ये कविताएँ दिल की गहराइयों से निकले हुए सच्चे अनुभवों का विस्तार हैं। सरल भाषा में लिखी गईं ये पंक्तियाँ पाठक के मन में सीधे उतरती हैं और उसे अपने अतीत, अपने प्रेम, अपनी तन्हाई और अपनी उम्मीदों से जोड़ देती हैं।
यह पुस्तक उन सबके लिए है जिन्होंने कभी किसी को टूटकर चाहा है, खोया है, या फिर ख़ुद से दोबारा मिलने की कोशिश की है।
हर कविता आपको अपने किसी अधूरे पल की याद दिलाएगी — और शायद वही याद आपको फिर से मुस्कुराने की वजह दे जाएगी।
About The Author
रंजन श्रीवास्तव का जन्म 25 अप्रैल को कोलकाता में हुआ। वे एक संवेदनशील कवि और चिंतनशील रचनाकार हैं, जिनकी कविताओं में जीवन के गहरे अनुभव, स्मृतियाँ, प्रेम, विरह और आत्मसंवाद के भाव सहज रूप में व्यक्त होते हैं।
IIT कानपुर के पूर्व छात्र और पेशे से इंजीनियर रंजन श्रीवास्तव वर्तमान में NTPC मे कार्यरत हैं, जहाँ वे अपने पेशेवर जीवन के साथ-साथ साहित्य और संवेदना की दुनिया में भी सक्रिय हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के बावजूद, उनकी रचनाओं में मानवीय भावनाओं की गर्माहट, आत्मविश्लेषण की गहराई और शब्दों की कोमलता झलकती है।
“यादगार पल” उनका कविता-संग्रह है, जिसमें जीवन के सहेजे हुए क्षणों, अनकहे शब्दों और मन की गहराइयों को उन्होंने बेहद सरल, परंतु मार्मिक भाषा में व्यक्त किया है। उनकी कविताएँ पाठकों को भीतर तक छूती हैं और उन्हें अपने अनुभवों से जोड़ देती हैं।





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