Description
ABOUT THE BOOK
“इस पुस्तक “THE GODFATHER OF INVENTION” को कई तलों पर पढ़ा जा सकता है और इसमें कई आयाम और अर्थ छुपे हुए हैं। जो हर व्यक्ति को उसके समझ, अभ्यास और इच्छा के अनुसार रंजन, मनोरंजन,मार्गदर्शन, ज्ञान, बोध और बुद्धिमता देने की क्षमता रखते हैं।
क्योंकि यह बुक पांच तलो पर एक साथ चल रही है जैसे पांच रास्ते एक साथ चल रहे हो। उदाहरण के लिए जैसे एक लंबी दूरी की रेलगाड़ी जब अपना सफर शुरू करती है तब वो बीच-बीच में कई मुसाफिर को उनकी मंजिल ( स्टेशन ) तक पहुंचते हुए आगे बढ़ती है और अपने डेस्टिनेशन (लास्ट स्टेशन) पर पहुंचती है तो यह बुक भी कुछ इसी प्रकार से हैं कि इसको पढ़ने वाले हर व्यक्ति , बालक अथवा महिला को उसकी आयु , आवश्यकता, समझ और आईडेंटिटी के अनुसार कुछ ना कुछ ज्ञान, मार्गदर्शन, मनोरंजन और बुद्धिमता की बातें अवश्य मिलती रहेंगी। लेकिन जैसे रेलगाड़ी की मंजिल उसका आखिरी प्लेटफार्म होता है वैसे ही इस पुस्तक का आखिरी मंजिल (प्लेटफॉर्म ) लोगों या विद्यार्थियों को साइंटिस्ट , इन्वेंटर और एंटरप्रेन्योर बनाना है तो इसलिए जो इसे अंत तक पढ़ेगा और इस पुस्तक में लिखी बातों को अपने जीवन में इंप्लीमेंट करेगा । तो उसे उस रहस्यमय ज्ञान, फार्मूला और फॉर्मेट की प्राप्ति होगी जिसको सीख कर वो व्यक्ति साइंटिस्ट , इन्वेंटर और एंटरप्रेन्योर बन जाएगा।
तो इस वजह से “THE GODFATHER OF INVENTION” को ग्यारह-बारह वर्ष की आयु से अधिक कोई भी पढ़ सकता है या सकती है। लेकिन मुख्य रूप से यह बुक साइंटिस्ट, इन्वेंटर और एंटरप्रेन्योर बनाने के परपस से तैयार की गई है तो इसलिए यह बुक साइंटिस्ट और एंटरप्रेन्योर बनने की वो बातें सिखाएगी जो स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी आदि में नहीं सिखाई जाती हैं।”
ABOUT THE AUTHOR
“आनंद जायसवाल न केवल एक दूरदर्शी विचारक, आविष्कारक और वैज्ञानिक हैं, बल्कि एक कुशल लेखक और एंटरप्रेन्योर भी हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा सैद्धांतिक-विज्ञान के दायरे से परे, साहित्य और व्यवसाय के दायरे को भी समेटे हुए है। एक लेखक के रूप में, उन्होंने ऐसी ज्ञानवर्धक रचनाएं लिखी हैं जो ब्रह्मांड और मानव जीवन या अस्तित्व की पेचीदगियों का पता लगाती हैं।
इसके अतिरिक्त, समाज को लाभ पहुँचाने वाले उनके व्यावहारिक समाधानों से उनकी विचारों को रियलिटी में परिवर्तित करने की उनकी क्षमता का पता चलता हैं। आनंद के विविध कौशल सेट और अटूट समर्पण उन्हें एक सच्चे स्वनिर्मित व्यक्ति के रूप में चिह्नित करता हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्थायी योगदान देने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, वह विज्ञान के क्षेत्र में “”QUANTOANANDLOGY”” नामक एक नए विषय को पेश करने की कगार पर हैं, जो ब्रह्मांड को समझने की हमारी क्षमता और समझ में क्रांतिकारी बदलाव लाने और ज्ञान की नई सीमाओं को खोलने का वादा करता है।
जयसवाल जी को अपने शैक्षणिक यात्रा में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा , जिसमें आर्किटेक्चर इंजीनियर की पढ़ाई के दौरान कॉलेज का छूट जाना भी शामिल है जिससे वह अपना आर्किटेक्ट इंजीनियर बनने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए थे, लेकिन आनंद के अटूट दृढ़ संकल्प , खोज और सफलता के प्रति जुनून ने उन्हें आगे बढ़ाया है जिस वजह से वे कई छोटी-बड़ी असफलता के बावजूद भी आज वो यहां पर है। और मुझे आशा है कि एक दिन, हम और हमारी आने वाली पीढ़ी उन्हें एक आर्किटेक्ट इंजीनियर के रूप में न सही, लेकिन एक अग्रणी ब्रह्मांड इंजीनियर या वैज्ञानिक के रूप में पहचानेंगे और याद रखेंगे।”


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