Description
“लौट के मत आना” प्रतिष्ठित साहित्यकार रविन्द्र ‘रवि’ का एक बेहद संवेदनशील और मार्मिक ग़ज़ल-संग्रह है। अंबाला की पावन और सृजनशील धरती से उपजी ये ग़ज़लें सीधे दिल पर दस्तक देती हैं।
इस संग्रह में प्रेम, विरह, इंतज़ार और जीवन के गहरे अनुभवों को बड़ी सादगी और गहराई के साथ पिरोया गया है। लेखक ने अपनी कलम के माध्यम से उन जज्बातों को आवाज़ दी है, जिन्हें अक्सर लोग कह नहीं पाते। किताब का शीर्षक “लौट के मत आना” एक ऐसी पुकार है जिसमें दर्द भी है और स्वाभिमान भी।





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