Description
ABOUT THE BOOK
विशेष देश -काल में घटी घटना के प्रसंग को संक्षिप्त सर्गों में विभक्त करके संदेश परक लिखे जाते हैं ।
इसी श्रंखला में मेरे अन्तर्मन ने सन्1997के आस-पास इस कृति को जन्म दिया था ।इसे आठ सर्गों में विभक्त किया गया है । प्रायः द्रुतविलंवित, हरिणी, मालिनी आदि वार्णिक अतुकांत छंदों के साथ लयात्मक मुक्त छंद भी प्रयुक्त किए गये हैं । इसमें अर्वाचीन और प्राचीन काव्यिक संस्कृति का निर्वाह किया गया है ।
इसका प्रसंग श्री मद्भागवत के दशम स्कंध से लिया गया है । यह कालिय मर्दन पर आधारित एक रूपक प्रस्तुत किया गया है । इसका नामकरण #व्याल#इसीलिए किया गया है ।
कथा है कि भगवान कृष्ण ने कालिय का मर्दन कर उसे निकाल कर यमुना को परिशुद्ध किया था । भगवान का यह कार्य पर्यावरण शुद्धि के साथ दुष्टों के नियंत्रण का धर्म स्थापना का कार्य था । व्याल एक सांस्कृतिक युगीन कालजयी रचना है ।
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