Description
हर व्यक्ति अच्छा नही होता , या यू कहु हर व्यक्ति सबकी नजर मे अच्छा नही होता , या बुरा भी नही होता , उसके भीतर पाए जाने वाले गुण दोष भी एक से नही होते या इसे ऐसे कह सकते है कि सबके भीतर यह कम या ज्यादा होते या हो सकते है अगर किसी मे गुण दोष है तभी जाकर कोई व्यक्ति या मनुष्य है | जब सभी व्यक्ति एक बराबर नही है तो यह कैसे हो सकता है कि उनके भीतर के गुण दोष भी बराबर हो , उसका कारण यह है कि हर व्यक्ति के साथ घटने वाली घटनाए और उससे पैदा होने वाली स्थितिया व परिस्थितिया अलग है और यही परिस्थितिया उसकी समझ ज्ञान और लोगो के बीच स्थान निर्धारित करती दिलाती है और लोगो द्वारा किए गए वर्तावों के कारण उस व्यक्ति मे दूसरों के प्रति अनेक प्रकार के भाव या भावनाए जैसे प्रेम , घृणा , ईर्ष्या , द्वेष , खुशी , गम , हर्ष , शोक आदि उपजते रहते है | व्यक्तियों से मिलकर परिवार बनता है , परिवारों से मिलकर समाज , समाजो से मिलकर गाँव , गांवो से मिलकर ब्लाक ( प्र्खन्ड ) , प्रखण्डो से मिलकर जिला , जिलो से मिलकर एक राज्य और राज्यो से मिलकर एक देश बनता है |
व्यक्तियों से मिलकर बनने वाले समाज के समूह को हम जनता कहते है या कह सकते है | यही जनता देश मे चल रही स्थितियो , परिस्थितियो और हालातों के अनुसार खुश , दुखी , उदास व प्रसन्न और आक्रोशित या रोती हँसती है | इन्ही कुछ विचारो को मैने इस संग्रह मे सबके सामने रखने का प्रयास किया है | पता नही मै इसमे कितना सफल रहा की कुछ भी सफलता नही मिली , यह सब मै पढ़ने और सनने वालो पर छोड़ता हू|
तारकेश्वर शाह
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