Description
About the book :
दिल से फिसलकर
होतों पे चलकर
एक दसरे से मिलकर
खुद को मतलाब देकर
बनी ये लफ्जों की महफिल।
लफ़्ज़ों से बात
बात में जज्बाती
जज्बात में ख्याली
ख्यालों को भुनकारो
कुछ अंदर की बात चीट सुनकरी
जादू सा पर कुछ अजीबो
देखते देखते बनी एक शायरी दिल की करीबो
लाखो ग़ज़ल और नज़्म से बनी
लफ़्ज़ों की महफ़िल ले
कभी जब दिल दुखः
वक्त भी दर्द से रूखा
गम जब बहे
आंसू कुछ कहे
फिर तकलीफ से दूधारी
गमन को कागज में रेशमा
जब लफ़्ज़ों ने किया बातों का बयान
फिर से बनी लफ्जों की महफिल नयन लो





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