Description
About The Book :
‘ओस की बूँदें’ प्रेमसागर चौहान का एक भावपूर्ण मुक्तक संग्रह है, जिसमें प्रेम, विरह, तन्हाई, स्मृतियाँ, पीड़ा, सामाजिक विसंगतियाँ, भक्ति और जीवन के विविध अनुभवों को सहज एवं सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। संग्रह की अधिकांश रचनाएँ टूटे हुए प्रेम, बेचैनी, हताशा और मन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। कवि के मुक्तक पाठकों के हृदय को स्पर्श करते हुए जीवन की सच्चाइयों से परिचित कराते हैं। यह संग्रह भावनाओं और विचारों का सुंदर संगम है।
About the Author :
प्रेमसागर चौहान एक संवेदनशील साहित्यकार एवं रचनाकार हैं, जिन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, भावनाओं और विचारों को गीत, ग़ज़ल तथा मुक्तकों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। उनकी ग़ज़ल संग्रह ‘तन्हाई के पल’ और ‘सीप समन्दर के’ पूर्व में प्रकाशित हो चुके हैं। ‘ओस की बूँदें’ उनका प्रथम मुक्तक संग्रह है। उनकी रचनाओं में प्रेम, विरह, सामाजिक सरोकार, भक्ति और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समावेश मिलता है। उनकी भाषा सहज, सरल और प्रभावशाली है।





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