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Bharose ki Lakeer

249.00

By: Vineet Agrawal

ISBN: 9789373355559

Language: Hindi

PRICE: 249

Page: 124

Category: FICTION / General

Delivery Time: 7-9 Days

Description

नक़्शे पर यह सिर्फ़ एक पतली-सी लकीर है — काग़ज़ पर खिंची एक सीधी रेखा। पर ज़मीन पर वही लकीर सैकड़ों खेतों, हज़ारों परिवारों और अनगिनत भावनाओं से होकर गुज़रती है।

बलासगंज के एक साधारण शिक्षक परिवार में जन्मे अर्जुन राठौर के लिए इंजीनियर बनने का सपना ही सबसे बड़ी चुनौती था — माँ की आख़िरी सोने की चेन बेचकर भेजी गई पढ़ाई, बरसों की मेहनत, और आख़िरकार एक बड़ी सार्वजनिक ऊर्जा कंपनी में नौकरी। पर जल्द ही अर्जुन को एहसास होता है कि राजस्थान के संगारपुर गाँव में पाइपलाइन बिछाना सिर्फ़ इंजीनियरिंग नहीं है — यह भरोसा बिछाना है, ज़िद्दी किसानों के मन में, उलझे हुए राजस्व रिकॉर्डों में, और ज़िला प्रशासन की जटिल फ़ाइलों में।

इसी संघर्ष के बीच उसकी मुलाक़ात होती है निडर, अनुशासित एसडीएम मीरा तवारी से — जिनका रिश्ता टकराव से शुरू होकर, धीरे-धीरे भरोसे, साझेदारी और आख़िर में एक गहरे प्रेम में बदल जाता है।

चार भागों और छत्तीस अध्यायों में फैली यह कहानी सिर्फ़ एक जीत की सीधी दास्तान नहीं — इसमें ज़मीन के काग़ज़ों की उलझनें हैं, गाँव वालों का गुस्सा और भरोसा दोनों हैं, प्रशासनिक जटिलताएँ हैं, एक गुरु की सीख है, और उन सबके बीच पनपता वह रिश्ता है जो हर मोड़ पर परखा गया।

भरोसे की लकीर विविधता में एकता, सेवा में समर्पण और सफलता में सहभागिता की उस भावना की कहानी है, जो किसी एक संगठन तक सीमित नहीं — यह हर उस व्यक्ति की कहानी है जो ज़मीन और इंसानों दोनों से ईमानदारी से जुड़ना चाहता है।

(यह एक काल्पनिक कृति है। इसमें वर्णित सभी पात्र, संस्थाएँ और घटनाएँ लेखक की कल्पना की उपज हैं।)

About The Author

विनीत अग्रवाल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं और वर्तमान में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) में प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। ऊर्जा एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक के अनुभव के दौरान उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में पाइपलाइन, प्राकृतिक गैस तथा विकास परियोजनाओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया है।

लेखन के प्रति उनका झुकाव जीवन के वास्तविक अनुभवों, मानवीय संबंधों और समाज की संवेदनशीलताओं को समझने की निरंतर जिज्ञासा से प्रेरित है। “भरोसे की लकीर” उनका प्रथम उपन्यास है, जिसमें विकास, विश्वास, संघर्ष और मानवीय रिश्तों की गहराई को एक साथ पिरोया गया है। यह उपन्यास बताता है कि कुछ लकीरें केवल ज़मीन पर नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में भी खिंचती हैं।

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