Description
ABOUT THE BOOK
द्वापर युग का आर्यावर्त परमवीरों और तेजस्वी ऋषि मुनियों के लिए प्रसिद्ध रहा है। भगवान श्री कृष्ण के गुरु के रूप में संदीपन ऋषि और कुरु वंश के गुरु के रूप में गुरु द्रोणाचार्य के नाम विख्यात रहे हैं।
ऋषि भारद्वाज के पुत्र और भगवान परशुराम के शिष्य द्रोण का जीवन चरित्र अविस्मर्णीय रहा है। कुरु सेनापति के रूप में चक्रव्यूह की रचना कर अर्जुन पुत्र अभिमन्यु का वध आज भी स्मृति से आ जाता है।
प्रस्तुत उपन्यास ‘द्रोण की शपथ’ में गुरु द्रोण को समझने का एक लघु प्रयास किया गया है। हम जितना उनके विषय में जानते हैं, गुरु द्रोण उससे कहीं अधिक रहे हैं। एक शपथ ने द्रोण के जीवन की दशा और दिशा किसको किस प्रकार बदल दिया -जानने योग्य है। आशा है आपको ‘द्रोण की शपथ’ पुस्तक आपके अनुत्तरित प्रश्नों का उत्तर देगी।


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